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Tuesday, April 7, 2026

आज से सोशल मीडिया स्क्रीनिंग शुरू, भारतीय आवेदकों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली। ट्रंप प्रशासन ने सोमवार से H-1B वीजा और H-4 वीजा आवेदकों की जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच आज (सोमवार) से शुरू होगी। जांच के दौरान सभी की सोशल मीडिया प्रोफाइल भी चेक की जाएगी। ट्रंप प्रशासन ने एक नया आदेश जारी करते हुए कहा है कि 15 दिसंबर से H-1B वीजा का आवेदन करने वालों और उनपर आश्रित लोगों की ऑनलाइन उपस्थिति की समीक्षा की जाएगी।

स्टूडेंट्स पहले से ही इस समीक्षा के दायरे में थे। वहीं, अब अमेरिकी प्रशासन ने ऑनलाइन उपस्थिति के साथ-साथ सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच करने का भी आदेश दिया है। साथ ही H-1B वीजा और H-4 वीजा आवेदक और उनपर आश्रित लोग भी इस जांच के दायरे में आएंगे।

अमेरिकी विभाग ने दिया आदेश

अमेरिकी विभाग के अनुसार, “जांच प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए वीजा आवेदन करने वाले सभी लोगों की सोशल मीडिया प्रोफाइल भी देखी जाएगी। सभी लोगों को अपनी प्रोफाइल प्राइवेट से सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है।”

अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि अमेरिका का वीजा लेना अपने आप में एक विशेष अधिकार है। इसलिए वीजा देने से पहले अच्छी तरह से छानबीन करना बेहद जरूरी है। इस दौरान विभाग उन लोगों की पहचान करता है, जो अमेरिका में आने के योग्य नहीं हैं। ऐसे लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।

विदेश विभाग ने आगे कहा-

हम सभी वीजा आवेदकों की पूरी तरह से जांच करते हैं। इस जांच में एफ, एम और जे श्रेणी के सारे छात्र समेत एक्सचेंट विजिटर भी शामिल होते हैं, जिन्होंने वीजा के लिए आवेदन किया है।

विदेश विभाग ने दी चेतावनी

विदेश विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वीजा जारी करते समय अमेरिका को सतर्क रहने की जरूरत है। इस बात की गहन जांच की जानी चाहिए कि वीजा का आवेदन करने वालों का इराजा कहीं अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाना तो नहीं है?

बता दें कि H-1B वीजा धारकों में सबसे ज्यादा भारतीय पेशेवर होते हैं। इसी साल सितंबर में ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी थी।

भारतियों पर कैसे होगा असर?

H-1B वीजा पाने वालों में करीब 70% भारतीय हैं। वित्त वर्ष 2024 में भारत को करीब 80,500 नए H-1B वीजा मिले, इसलिए यह सख्ती सबसे ज्यादा भारतीय पेशेवरों को प्रभावित कर रही है।

अमेरिका एक नए प्रस्ताव पर काम कर रहा है, जिसके तहत टूरिस्ट और बिजनेस ट्रैवलर्स से भी पिछले 5 साल की सोशल मीडिया जानकारी मांगी जा सकती है। इससे यूके, जर्मनी, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के यात्रियों पर भी असर पड़ेगा, जो अब तक वीजा-फ्री यात्रा करते थे।

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