5.4 C
New York
Thursday, February 19, 2026

मुझे नोबेल नहीं दिया, अब शांति मेरी जिम्मेदारी नहीं……ग्रीनलैंड चाहिए, ट्रंप की चिट्ठी हो गई लीक

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर अपनी नाराजगी नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे को लिखे पत्र में जाहिर की है। पत्र के लीक होने से पता चला कि ट्रंप ने लिखा कि नोबेल पुरस्कार न मिलने के बाद अब उन्हें दुनिया में शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी महसूस नहीं होती। उन्होंने साफ किया कि शांति महत्वपूर्ण है, लेकिन अब उनकी प्राथमिकता अमेरिका का हित होगा। ट्रंप ने स्वीकार किया कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की उनकी कोशिश इसी झुंझलाहट से प्रेरित है।
नॉर्वे के पीएम को लिखे पत्र में ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क, जिसका ग्रीनलैंड स्वायत्त क्षेत्र है, रूस या चीन से इस क्षेत्र को सुरक्षित नहीं रख सकता, इसलिए उनके पास इस पर मालिकाना हक क्यों है। उन्होंने कहा, “सैकड़ों साल पहले नावें वहां पहुंचीं, लेकिन अमेरिकी नावें भी पहुंची थीं।” ट्रंप ने अपने पत्र में संकेत दिया कि नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के बाद उनका वैश्विक दृष्टिकोण बदल गया है और अब वे अमेरिका के रणनीतिक हितों पर अधिक ध्यान देने वाले है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री स्टोरे ने पत्र की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब्ब के साथ मिलकर ट्रंप को एक पत्र भेजा था जिसमें नॉर्वे और अन्य देशों पर टैरिफ लगाने का विरोध किया गया था। ट्रंप के पत्र को उन्होंने उसी संदर्भ में प्राप्त किया। इसके अलावा, रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने इस तरह के पत्र कई यूरोपीय राजदूतों को भी भेजे हैं। ट्रंप ने कई बार कहा कि वे ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व के अलावा किसी और विकल्प को स्वीकार नहीं करने वाले है। उन्होंने डेनमार्क पर आर्कटिक क्षेत्र में कथित “रूसी खतरे” से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया। ट्रंप ने लिखा कि नाटो ने पिछले 20 वर्षों से डेनमार्क को ग्रीनलैंड में सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा, लेकिन डेनमार्क कोई कार्रवाई नहीं कर पाया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिलेगी, तब तक वे यूरोपीय सहयोगियों पर बढ़ते टैरिफ लगाएंगे। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने ट्रंप के रुख को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और इस अमेरिका का हिस्सा नहीं बनना है। यूरोपीय अधिकारी इस बात पर भी जोर देते हैं कि ग्रीनलैंड पहले से ही नाटो की सामूहिक रक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। ट्रंप का तर्क है कि चीन और रूस की बढ़ती उपस्थिति के कारण ग्रीनलैंड अमेरिकी सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन डेनमार्क और यूरोप इसे बेचने या हस्तांतरण की अनुमति देने को तैयार नहीं हैं। पत्र से यह भी पता चलता है कि ट्रंप की वैश्विक नीतियों में व्यक्तिगत प्रेरणाएँ और पुरस्कारों की उम्मीदें भी प्रभाव डालती हैं। नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने की प्रतिक्रिया में उन्होंने सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय विवाद और रणनीतिक संपत्ति पर अमेरिकी दबाव की बात की। यह घटनाक्रम अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव को दर्शाता है और दिखाता है कि ट्रंप प्रशासन वैश्विक मामलों में अपने दृष्टिकोण को कैसे व्यक्तिगत महत्व और राष्ट्रीय हितों के आधार पर आकार देता है।

Previous articlePetrol-Diesel Price Alert: मंगलवार को बदल गए तेल के दाम, टंकी फुल कराने से पहले चेक करें अपने शहर की ताजा रेट लिस्ट
Next articleछत्तीसगढ़ में रेल यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें, 24–31 जनवरी तक 14 ट्रेनें रद्द
News Desk

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles