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Wednesday, February 18, 2026

न्यूयॉर्क की अदालत ने निखिल गुप्ता को सुनाई 24 साल की सजा

न्यूयॉर्क। प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के सरगना और घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने के हाई-प्रोफाइल मामले में अमेरिकी अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यूयॉर्क की एक अदालत ने भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को इस साजिश में संलिप्तता के लिए 24 साल के कठोर कारावास की सजा दी है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान निखिल गुप्ता ने अपने ऊपर लगे सभी गंभीर आरोपों को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद न्यायाधीश ने सजा का निर्णय लिया। हालांकि, सजा का औपचारिक और विस्तृत ऐलान 29 मई को किया जाएगा।
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई और अटॉर्नी ऑफिस द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, निखिल गुप्ता (उर्फ निक) ने सेकंड सुपरसिडिंग इंडिक्टमेंट के तहत खुद पर लगे तीन प्रमुख आरोपों को कबूल किया है। इन आरोपों में सुपारी देकर हत्या की कोशिश (मर्डर-फॉर-हायर), इस हत्या के लिए साजिश रचना और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश शामिल है। अमेरिकी एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि यह पूरी साजिश एक अमेरिकी नागरिक के विरुद्ध रची गई थी, जिसे समय रहते खुफिया कार्रवाई के माध्यम से नाकाम कर दिया गया।
अमेरिकी प्रॉसिक्यूटर्स द्वारा अदालत में पेश की गई चार्जशीट इस पूरी साजिश की परतें खोलती है। इसके अनुसार, साजिश की शुरुआत मई 2023 में हुई थी। आरोप है कि भारत के एक पूर्व सुरक्षा अधिकारी, जिसकी पहचान विकास यादव (सीसी-1) के रूप में की गई है, ने निखिल गुप्ता को इस काम के लिए तैयार किया था। इस योजना के तहत पन्नू की हत्या के लिए एक हिटमैन से संपर्क किया गया, लेकिन निखिल को इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह जिस व्यक्ति को सुपारी दे रहा है, वह असल में अमेरिकी जांच एजेंसी का अंडरकवर एजेंट है। जून 2023 में इस हत्या के लिए कुल 1 लाख डॉलर (लगभग 84 लाख रुपये) की डील तय हुई थी, जिसमें से 15 हजार डॉलर की एडवांस पेमेंट एक माध्यम के जरिए पहुंचाई गई। इसी दौरान कनाडा में आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई, जिसके बाद निखिल ने कथित तौर पर हिटमैन से काम में तेजी लाने को कहा था। निखिल गुप्ता को 30 जून 2023 को चेक रिपब्लिक में गिरफ्तार किया गया था और करीब एक साल बाद जून 2024 में उसे अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया। शुरुआत में खुद को निर्दोष बताने वाले निखिल ने अब सबूतों के आगे घुटने टेकते हुए अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।
इस मामले में अमेरिकी एजेंसी एफबीआई ने विकास यादव को भी वांटेड घोषित किया है। हालांकि, भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिस व्यक्ति का नाम अमेरिकी चार्जशीट में आया है, वह अब भारत सरकार का कर्मचारी नहीं है। भारत ने इस मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति भी गठित की है। वहीं, जिस गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की यह साजिश थी, वह भारत में यूएपीए के तहत घोषित आतंकी है। पंजाब के खानकोट का रहने वाला पन्नू अमेरिका और कनाडा की नागरिकता रखता है और लगातार भारत विरोधी गतिविधियों और अलगाववाद को बढ़ावा देने के मामलों में वांछित है। अमेरिकी अदालत का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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News Desk

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