4.7 C
New York
Thursday, March 12, 2026

जंग का अखाड़ा, होर्मुज मार्ग में बारुद बिछा रहे ईरान की 16 जहाजों को अमेरिका ने कर दिया तबाह

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को युद्ध के मैदान में तब्दील कर दिया है। बुधवार को अमेरिकी सेना की ओर से जारी एक बड़े बयान में दावा किया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी नौसेना के 16 जहाजों को नष्ट कर दिया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ये जहाज व्यापारिक मार्ग में बारूदी सुरंगे (माइन्स) बिछाने की गतिविधियों में लिप्त थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने समुद्री रास्ते में बाधाएं उत्पन्न करना बंद नहीं किया, तो उसे और भी गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि अमेरिका अपनी उसी तकनीक का उपयोग कर रहा है, जिससे मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
इस सैन्य टकराव का सबसे विनाशकारी प्रभाव वैश्विक व्यापार पर पड़ा है। 10 मार्च तक होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से वाणिज्यिक यातायात लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस मार्ग को बंद करने की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन युद्ध के अत्यधिक जोखिम को देखते हुए बीमा कंपनियों ने जहाजों का बीमा करने से मना कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, मार्सक और हैपग-लॉयड जैसी दुनिया की दिग्गज शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का मार्ग बदल दिया है। अब व्यापारिक जहाजों को केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से भेजा जा रहा है, जिससे माल ढुलाई का समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक आठ नाविकों की जान जा चुकी है और कई तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त अस्थिरता देखी जा रही है। 9 मार्च को कच्चे तेल की कीमत उछलकर 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो वर्तमान में 88-90 डॉलर के आसपास बनी हुई है। ज्ञात हो कि दुनिया के कुल तेल उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है। एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं, विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह इस मार्ग पर टिकी है। अमेरिकी ऊर्जा प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, यहां से गुजरने वाले कच्चे तेल का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा एशियाई देशों को ही जाता है।
इस संकटपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर वार्ता कर भारत की गहरी चिंताओं से अवगत कराया। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी महत्वपूर्ण बातचीत है। भारत का मुख्य सरोकार ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है, क्योंकि इस मार्ग के बंद होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा।

Previous articleकृतिका कामरा और गौरव कपूर की शादी की अनदेखी तस्वीरें आईं सामने, सोशल मीडिया पर मची हलचल
Next articleजीत के जश्न में विवाद: हार्दिक पांड्या पर राष्ट्रीय ध्वज के अनादर का आरोप
News Desk

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles